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नगर निगम की 335वीं मीटिंग : शपथ समारोह न होने की वजह से सांसद मनीष तिवारी ने नहीं लिया भाग

बीजेपी बोली- अब चंडीगढ़ में गठबंधन की डबल इंजन सरकार तो तेजी से हो काम

गठबंधन का जवाब, कल तक बीजेपी की चंडीगढ़ में थी डबल इंजन सरकार तब क्यों नहीं किए काम

भरत अग्रवाल , चंडीगढ़ दिनभर : नगर निगम की 335वीं बैठक मेयर कुलदीप कुमार के नेतृत्व में मंगलवार को हुई। बैठक तय समय 11 बजे से करीब 45 मिनट देरी से शुरू हुई और करीब एक बजे जो एजेंडा शामिल किए गए थे उन पर चर्चा हुई। बैठक में चंडीगढ़ के गठबंधन से नवनिर्वाचित सांसद मनीष तिवारी शामिल नहीं हुए। क्योंकि नवनिर्वाचित सांसद मनीष तिवारी का शपथ ग्रहण समारोह अभी नहीं हुआ है।
इस दौरान 20 प्रस्ताव रखे गए, जिनमें रोज गार्डन और सेक्टर-33 के टेरेस गार्डन को दिव्यांग लोगों की सहूलियत के हिसाब से बनाने का एजेंडा लाया गया। अब दिव्यांग लोग आसानी से पार्कों में एंट्री कर सकेंगे। पार्कों में रैंप बनाए जाएंगे। रोज गार्डन के लिए इसकी अनुमानित लागत करीब 91.19 लाख है। वहीं, टेरेस गार्डन के लिए भी 93.15 लाख का बजट रखा है। बैठक में सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट को अपडेट करने का प्रस्ताव लाया गया। यह श्मशान घाट चंडीगढ़ का सबसे बड़ा श्मशान घाट है। इसे करीब 7 करोड़ की लागत से अपडेट किया जाएगा। बारिश के दिनों में यहां पानी जमा होने और पार्किंग की काफी समस्या होती है। यहां दिव्यांग लोगों के आने-जाने की कोई व्यवस्था नहीं है। उसे भी अब सुधारा जाएगा।
निगम की एजेंसी में 2.6 करोड़ से 5 कार्यालय और पांच सफाई बूथ बनाने का प्रस्ताव लाया जा रहा है। ये बूथ चंडीगढ़ निगम की सीमा में बनाए जाएंगे। जहां सफाई कर्मचारी काम पर जाने से पहले और काम से वापस आने के बाद इक_ा होंगे। यहां उनकी हाजिरी दर्ज की जाएगी। मीटिंग में यह स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में शहर के 32 ट्यूबवेल को बंद कर दिया जाएगा, लेकिन पानी की सप्लाई नहीं बाधित होगी। यहां पर काम कर रहे सभी कर्मचारियों को भी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा बता दें कि ये ट्यूबल काफी समय से खराब पड़े थे।

चंडीगढ़ प्रशासन के फैसलों से पार्षद को आती है समस्या : गाबी

निगम की हाउस मीटिंग में कांग्रेस पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन बिना जनता के प्रतिनिधि की राय जाने ऐसे फैसले ले रहा है जिसकी वजह से लोगों का रोष बढ़ रहा है। इसी वजह से प्रशासन के फैसलों पर एरिया के लोगों का गुस्सा और खिलाफत पार्षद को झेलनी पड़ रही है। प्रशासन की तरफ से वर्ष 2024 के लिए बिजली की दर में वृद्धि के प्रस्ताव पर गाबी ने अपनी बात रखी। वहीं, सांसद तिवारी इसका सोशल मीडिया पर विरोध भी कर चुके हैं। पार्षद और मेयर को प्रशासक के सलाहकार से मिलकर मांग रखनी चाहिए।

इस माह 2 बार होगी मीटिंग : लोकसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लगने के बाद नगर निगम की बैठक बंद हो गई थी। यह बैठक आचार संहिता खत्म होने के बाद पहली बैठक है। इसमें कुछ टेबल एजेंडे भी शामिल हुए। विकास कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए नगर निगम की दूसरी बैठक इसी माह होगी।

नौकरी घोटाले की जांच की मांग : पार्षद रामचंद्र यादव ने हाउस मीटिंग में फर्जी नौकरी घोटाले पर उच्च स्तरीय जांच करने की मांग उठाई यादव ने कहा कि इस तरह के घोटाले से नगर निगम और शहर का नाम खराब होता है इस घोटाले में चाहे वह नगर निगम का अधिकारी है या कोई पॉलिटिकल लीडर सबके नाम सामने आने बहुत जरूरी है। करोड़ों रुपए की कि इस ठगी का शिकार हुए लोगों को इंसाफ मिलना बहुत जरूरी है मत निगम मेयर और सांसद मनीष तिवारी से आग्रह करता हूं कि इस घोटाले की जांच जल्दी और उच्च स्तरीय करवाने की आवश्यकता है।

प्रेम लता ने पूर्व मेयर अनूप गुप्ता की कर दी बोलती बंद : मीटिंग में पूर्व मेयर अनूप गुप्ता ने कहा कि नए एजेंडा को पास करने की जगह हमें शुरू न हो सकने वाले पुराने एजेंडे (हाउस मीटिंग में पास हो चुके हैं) पर बात करनी चाहिए। इस पर आप पार्षद प्रेम लता ने गुप्ता को कहा कि उस समय आप खुद मेयर थे। यदि पिछली हाउस मीटिंग में पास एजेंडा पर काम शुरू नहीं हुआ था तो उसके दोषी आप खुद हैं। क्योंकि आप तो उस समय आम आदमी पार्टी के पार्षदो को हाउस मीटिंग में से बाहर निकालने में बिजी थे। उस समय जो एजेंडे पास हुए थे उन पर कभी चर्चा नहीं हुई। बल्कि धक्के से पास किए गए थे। इसके बाद अनूप गुप्ता बिना जवाब दिए चुपचाप बैठ गए।

डबल इंजन की सरकार कहने पर पार्षद जसबीर सिंह को आया गुस्सा : बीजेपी पार्षद ने कहा कि अब चंडीगढ़ में इंडिया गठबंधन की डबल इंजन वाली सरकार है तो विकास कार्य तेजी से होने चाहिए। यह बात सुनते कांग्रेस के पार्षद जसबीर सिंह बंटी ने गुस्से में कहा कि कल तक तुम्हारी यानि की बीजेपी की डबल इंजन वाली सरकार थी तो चंडीगढ़ में विकास कार्य क्यों नहीं किए। आज इंडिया गठबंधन शहर में विकास के लिए कुछ करना चहता है तो तुम रोकने का प्रयास कर रहे हो। बंटी की बात पर कांग्रेस पार्षद तरुणा मेहता ने सहमति जताते हुए कहा कि अगर काम करने की नीयत हो तो निगम मेयर चंडीगढ़ में विकास कार्य की लहर ला सकता है। दुखद है कि 8 साल से बीजेपी का मेयर और सांसद दोनों के रहते हुए भी चंडीगढ़ में रह रहे लोगों की बेसिक समस्याओं तक का समाधान नहीं हुआ। कांग्रेस पार्षद जसबीर सिंह बंटी ने कहा कि गांव अटावा और सेक्टर-42 में सडक़ किनारे और लेक के आस पास रेहड़ी फड़ी वालों का अतिक्रमण हो रखा है। इसे हटाने के लिए निगम के एरिया इंस्पेक्टर को भी बोल चुके हैं लेकिन कार्रवाई नहीं होती। यहां पर रहने वाले लोगों को इस वजह से काफी परेशानी होती है।
खराब मीटर के नोटिस निकालने में निकल जाता है दिन : निगम कमिश्नर आनंदिता मित्रा ने कहा कि शहर में इनते ज्यादा पानी के मीटर खराब पड़े हैं कि उनको नोटिस निकालने में पूरा दिन लग जाता है। बावजूद वह नया मीटर अप्लाई नहीं करते। यह बात मित्रा ने बीजेपी पार्षद कंवरजीत सिंह राणा के आरोप लगाने पर कही। कंवरजीत सिंह राणा का आरोप था कि निगम एरिया के उनके एरिया में रहने वाले लोगों को पानी के जो बिल भेजे जा रहे हैं उसे बिना रीडिंग नोट किए और जेई मनमानी करते हुए भेज रहा है। निगम के चीफ इंजीनियर एनपी शर्मा ने कहा कि उस एरिया के अधिकतर लोगों के घर पर जो पानी के मीटर लगे हैं, वह खराब हो चुके हैं। नए मीटर के लिए अप्लाई नहीं कर रहे हैं। एरिया के जेई ने खुद मौके पर जाकर देखा कि मीटर का लोड इस्तेमाल होने वाले पानी से काफी कम है।
गर्मी में 3 दिन तक पीने को पानी नहीं मिलता : बीजेपी पार्षद मनोज सोनकर ने कहा कि मौलीजागरां में लगे ट्यूबवेल की मोटर आए दिन खराब रहती है। इसी वजह से वहां पीने के पानी की सप्लाई 3 दिनों से भी अधिक समय तक बदं रहती है। कई बार संबधित विभाग के अधिकारियों को लिखित और मौखिक तौर पर अतिरिक्त मोटर रखने का आग्रह कर चुका हूं, लेकिन आज तक उस शिकायत पर अमल नहीं हुआ।

म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का नाम रख देना चाहिए म्युनिसिपल करप्शन : जोशी

बीजेपी पार्षद सौरभ जोशी ने कहा कि आए दिन ठेकेदारों के काले चि_े सामने आ रहे हैं। इस करप्शन की भनक निगम अधिकारियों व पार्षदों को नहीं होती। लेकिन अगले दिन अखबारो में सुर्खियां होती हैं कि निगम में एक और घोटाला। जोशी ने कहा कि निगम हाउस मीटिंग में करप्शन में लिप्त व्यक्ति पर ठोस कार्रवाई करने के लिए एक कमेटी बननी चाहिए। उस करप्शन में कोई भी शामिल मिलता है तो उस पर तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। फिर चाहे पार्षद या फिर निगम अधिकारी हो।