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-अस्पताल की एमएस के आश्वासन पर काम पर लौटे सफाई कर्मचारी

अजीत झा, चंडीगढ़ : रामदरबार इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 स्थित इएसआई अस्पताल में काम कर रहे है सफाई कर्मचारियों ने सैलरी न आने से काम बंदकर शांति पूर्वक प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दूसरे दिन वीरवार को भी कर्मचारी ने रोष जताया। अस्पताल के एमएस सीमा के आश्वासन के बाद कर्मचारी काम पर लौटे।
कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें समय पर सैलरी दी जाए। प्रदर्शन में 35 से 40 सफाई कर्मचारी शामिल थे, जिसमें ईएसआई कर्मचारी वर्कर यूनियन प्रधान बालकराम, रामेश्वर सिंह, नरेश कुमार, अभिषेक, राम सिंह, आज़ाद, नरेश, वीर सिंह, रामपाल, किरपाल, जगपाल, ओमप्रकाश आदि शामिल रहे। बता दें कि ईएसआई अस्पताल में लम्बे समय से काम कर रहे सफाई कर्मचारी हर माह मेहनत की कमाई के लिए उन्हें प्रदर्शन पर बैठना
पढ़ता है।
वहीं, बुधवार और वीरवार को भी सफाई कर्मचारी अपनी सैलरी समय पर ना मिलने को लेकर प्रदर्शन पर थे। अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट सीमा के आश्वासन कर्मचारियों को रोष खत्म हुआ अपने-अपने काम पार्ट तो लौट पर ईएसआई कर्मचारी वर्कर यूनियन के प्रधान बालकराम का कहना है कि जब से नया टेंडर के संस रजिस्टर्ड कंपनी के पास आया है तब से कर्मचारियों की सैलरी समय पर नहीं आ रही पिछले 8 -9 माह से उन्हें हर माह अपनी ही सैलरी लेने के लिए प्रदर्शन करना पढ़ जाता है। के संस के ठेकेदार दिलीप कुमार का कहना है की ऐसी कोई भी बात नहीं है समय पर कर्मचारियों को सैलरी मिलती है।
कभी कभी हो जाता है की सैलरी लेट पहुंचती है कर्मचारियों को। ठेकेदार ने कहा की सैलरी की मांग को लेकर कर्मचारियों के प्रदर्शन की मुझे जानकारी नहीं है अगर ऐसी कोई समस्या है तो मैं चेक करवा
लेता हूं।

मंगलवार को कर्मचारी ने की थी आत्महत्या

मंगलवार को चंडीगढ़ के खेल विभाग के सेक्टर 38 स्थित स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में तैनात महेंद्र सिंह ने 3 महीने से वेतन न मिलने के कारण आत्महत्या कर ली थी। उसकी पत्नी मोना भी खेल विभाग के सेक्टर 16 क्रिकेट स्टेडियम में आउटसोर्स पर कार्यरत है। मोना को 2 महीने से वेतन नहीं मिला है। महेंद्र की आत्महत्या के बाद उसने अपनी शिकायत में कहा था कि वेतन न मिलने के कारण उसने यह आत्महत्या की है। अकेले खेल विभाग में ही करीब डेढ़ सौ से अधिक कर्मचारी हैं, जिनको अभी तक वेतन नहीं मिल पाया है। कर्मचारियों की तरफ से कई बार इसको लेकर प्रदर्शन भी किया गया है और अधिकारियों को इसकी शिकायत भी दी गई है। चंडीगढ़ में करीब 18000 कर्मचारी ऐसे हैं जो आउटसोर्स या अनुबंध पर कार्यरत हैं।