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किसी भी पार्क में नहीं बनाए गए रैंप जहां से पार्क में जा सकें

चंडीगढ़ दिनभर

सिटी ब्यूटीफुल! चंडीगढ़ को इसी नाम से जाना जाता है। इसकी खूबसूरती का राज है शहर का करीब 60-70 फीसदी में फैली हुई ग्रीन बेल्ट। हर सेक्टर में बने पब्लिक पार्क यहां रहने वालों को सूकून देने का काम करते हैं। लेकिन शहर की एक जमात है जिनके लिए इन चीजों के कोई मायने नहीं हैं। या यूं कह सकते हैं कि वो लोग सरकारी लापरवाही की वजह से इन पार्कों का आनंद नहीं उठा पा रहे हैं। ये लोग हैं शहर के दिव्यांग। चंडीगढ़ दिनभर की टीम ने जब पब्लिक पार्कों का दौरा किया तो यह अव्यवस्था सामने आई। इन पार्कों के एंट्री गेट जिस तरह से बनाए गए हैं, ऐसा लगता है जैसे दिव्यांगों के लिए यहां नो एंट्री है। इन पार्कों में एंट्री पर कहीं भी रैंप नहीं बनाए गए हैं। जहां से दिव्यांग अपनी मर्जी से यहां घूमने जा सकें। अगर किसी को इन पार्कों में व्हीलचेयर से जाना है तो उसे किसी के साथ होने का इंतजार करना पड़ेगा।

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इन पार्कों पर हर साल लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। ओपन जिम बनाए गए हैं। पार्कों के अंदर वॉकिंग-वे भी बनाए गए हैं लेकिन दिव्यांग इन सभी सुविधाओं से वंचित हैं। शहर के मेयर व हर वार्ड के पार्षद को इस ओर ध्यान आकर्षिक करना चाहिए। रोज गार्डन में एक एंट्री पर है रैंप। रोज गार्डन में 4 से 5 एंट्री पॉइंट हैं लेकिन सिर्फ एक जगह ही रैंप बनाया गया है जहां से व्हीलचेयर के साथ एंट्री की जा सकती है। लेकिन इसकी भी जानकारी कम ही लोगों को है। यह एंट्री पॉइंट पंजाब कला भवन की तरफ बनाया गया है। जबकि हर एंट्री पर ये सुविधा दी जानी चाहिए। इसी तरह शहर के अन्य मु य गार्डन्स पर भी इस तरह की सुविधा है लेकिन इस संबंध में कहीं भी कोई बोर्ड नहीं लगाया गया।

शहर में करीब 15 हजार दिव्यांग। सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट के अनुसार शहर में करीब 14 हजार 796 दिव्यांग हैं। इनमें से 4600 दिव्यांगों को सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट से पेंशन मिल रही है। इन हजारों दिव्यांगों को अनदेखा किया जा रहा है। पार्कों में एंट्री न होने की वजह से देखा जा सकता है कि अगर व्हीलचेयर पर बैठे किसी दिव्यांग को आराम करना होता है तो वो सड़क के किनारे ही रुक जाते हैं, जो कि अनसेफ है। अगर पार्कों में इनके लिए एंट्री बन जाए तो ये समस्या भी दूर हो जाएगी।