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Mukhtar Ansari Death: पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में आतंक का पर्याय बने गैंगस्टर-नेता मुख्तार अंसारी की गुरुवार को बांदा के एक अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। मिली जानकारी के मुताबिक, अब बांदा मेडिकल कॉलेज में मुख्तार अंसारी के पोस्टमार्टम के बाद उनके शव को बांदा से गाजीपुर ले जाया जाएगा। मुख्तार अंसारी के शव को ले जाने के लिए शव वाहन बांदा मेडिकल कॉलेज पहुंच गया है। इसी वाहन से माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के शव को गाजीपुर ले जाया जाएगा। पूछे जाने पर इस शव वाहन के ड्राइवर मनोज ने बताया कि गाजीपुर पहुंचने में लगभग 7 घंटे लगेंगे। इस वाहन में कुल 7 लोग बैठ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, दोपहर लगभग 2 बजे मुख्तार अंसारी के शव को उनके परिवार को सौंपा जाएगा।

मोहम्मदाबाद कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा मुख्तार अंसारी
माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी को गुरुवार को तबीयत बिगड़ने के बाद जिला जेल से रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई। उसकी मौत के बाद गाजीपुर मोहम्मदाबाद में सन्नाटा पसरा हुआ है। पूरे प्रदेश में धारा 144 लागू है, जिसके चलते आज गाजीपुर में सारी दुकानें बंद कर दी गई और पुलिस अलर्ट मोड पर है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। परिजनों की ओर से दी गई सूचना के अनुसार, गाजीपुर के मोहम्मदाबाद कब्रिस्तान में मुख्तार अंसारी को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।वहीं पर मुख्तार को सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारी की जा रही है। जिले में भारी सुरक्षा व्यवस्था भी की गई है।

कार्डियक अरेस्ट से हुई थी मुख्तार अंसारी की मौत

उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी की गुरुवार को मौत हो गई थी। मुख्तार को कार्डियक अरेस्ट के बाद गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मुख्‍तार अंसारी की मौत के बाद पूरे प्रदेश में अलर्ट कर दिया गया है। मऊ, बांदा और गाजीपुर में धारा 144 लागू कर दी गई है।

19 साल से जेल में बंद था मुख्तार अंसारी
बता दें कि मुख्तार अंसारी पिछले 19 साल से जेल में बंद था। अन्तर्राज्यीय गैंग 191 के सरगना मुख्तार को 25 अक्टूबर 2005 में जेल भेजा गया था। उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब में 65 मुकदमे दर्ज हैं। साल 2017 में यूपी में योगी सरकार के आने से पहले वो पंजाब की रोपड़ जेल में बंद था, उसे वापस उत्तर प्रदेश लाने के लिए योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी। जिसके बाद उसे बांदा जेल में शिफ्ट किया गया।