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भरत अग्रवाल ,चंडीगढ़ दिनभर: लोकसभा चुनाव 2024 में वोटर्स का रूख समझ से परे है। चंडीगढ़ की सभी राजनीति पार्टियां इस खामोशी को एक बड़े बदलाव की तरह देख रही हैं।
वोटर्स खुलकर किसी भी पार्टी को सपोर्ट करने और उनकी रणनीति की प्रशंसा करने से परहेज कर रहे हैं। एरिया के सभी पार्टी सपोटर्स को देख हां में हां मिलाई जा रही है। लोकसभा चुनाव होने को हैं और राजनीति पार्टियों की जनसभा और रैलियों में वोटर्स का रिस्पांस नहीं मिल रहा है। इसी वजह से पार्टी की कमान संभाल रहे। लीडर्स इस बात को लेकर टेंशन में हैं कि आखिरकार वोटर्स इतना साइलेंट क्यों हैं। पहले जहां लोकसभा चुनाव को लेकर सभी केंडीडेट को लेकर लोग चर्चा करते आम दिखाई देते थे, अब ऐसा नहीं हैं। वोटर्स केंडीडेट को लेकर अपने विचार सांझे नहीं कर रहे हैं।

दिन-प्रतिदिन शहर की राजनीति गंदी होती जा रही है। पहले पार्टी के लोकल लीडर्स मतदाता को मनाने की कोशिश करते थे और अब डराने की कोशिश। अगर पता चल जाए कि किसी दूसरी पार्टी का समर्थन या वोट किया है तो जान बूझकर उसे परेशान करने की कोशिश करते हैं। इसलिए वोटर्स अब किसी को पता नहीं लगने देने चाहता कि किस पार्टी या उम्मीदवार को सपोर्ट व वोट करेगा।

-जावेद खान

लोकसभा चुनाव किसी त्योहार से कम नहीं होते थे। अपनी मनपंसद पार्टी व केंडीडेट का प्रचार खुद वोटर करते थे लेकिन अब तो घर पर किसी केंडीडेट का स्टीकर या पोस्टर व झंडा लगाते हुए, डर लगता हैं। वर्तमान में किसी केंडीडेट को खुलकर स्पोर्ट करने का मतलब दूसरे को दुश्मन बनाना हैं। इसलिए जनसभा व रेलियों में जाने से लोग परहेज करते हैं और कोई न कोई बहाना बनाकर घर पर या फिर बाहर निकल जाते हैं।

-डॉ. प्रभप्रीत सिंह, अस्सिटेंट प्रोफेसर

लोकसभा चुनाव को लेकर शहर में चर्चा तो हो रही है लेकिन सिर्फ अपने नजदीकियों से। जैसे ही किस केंडीडेट को वोट करे, इस पर चर्चा करने लगते हैं तो सबसे पहले हर कोई एक ही बात कहता हैं कि बात बाहर न जाए। बड़े गुप्तचुप तरीके से बात होती हैं। मतदान अधिकार तो हैं इस्तेमाल डर-डर कर करना पड़ रहा हैं। क्योंकि अगर भनक लग गई कि दूसरे को वोट की हैं तो परेशानी आनी लाजमी हैं।

-हरीश बंसल, चंडीगढ़