डॉ. तरूण प्रसाद 2023 06 03T104312.126

भरत अग्रवाल. चंडीगढ़ दिनभर

सेक्टर-26 की सब्जी मंडी में शुक्रवार से सभी एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर 24 घंटे सुपरवाइजर और सिक्योरिटी गार्ड तैनात रहेंगे। इनकी ड्यूटी 8-8 घंटों की तीन शि टों में होगी। इस संबंधी आदेश स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के सेक्रेटरी आईएएस अफसर रूपेश कुमार ने दिए हैं। गौरतलब है कि पिछले काफी समय से मार्केट फीस लगातार कम होती जा रही थी। मार्केट कमेटी घाटे में चल रही थी। जितनी फीस इकट्ठी होती है उसका 40 फीसदी मार्केट कमेटी स्टेट एग्रीकल्चर बोर्ड को देता है, जिससे उसके खर्चे चलते हैं। लेकिन पिछले करीब 11 महीने का पैसा अभी तक बोर्ड को नहीं मिला है जो करीब 3.50 करोड़ रुपए है। करोड़ों रुपए की मार्केट फीस चोरी की भी कई शिकायतें विभाग के पास पहुंच चुकी हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहंी मंडी के एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स के जो हालात थे, उनसे साफ था कि कहीं न कहीं दाल काली है, जिसपर लगाम कसनी जरूरी थी।

किसी भी एंट्री पॉइंट पर कोई लिखा-पढ़ी करने वाला नहीं था कि कितनी गाड़ी आईं, कौन सा माल आया और कितना आया। आढ़ती जो बता देता था, सुपरवाइजर उसी से रजिस्टर मेंटेन कर लेता था। धांधली को रोकने के लिए कुछ स त कदम उठाने जरूरी थे। उसी दिशा में यह पहला कदम है। संबंधित अधिकारी ने बताया कि अब रिकॉर्ड मेंटेन रखा जाएगा। समय-समय पर छापामारी भी की जाएगी। अगर कोई गाड़ी रजिस्टर में बिना एंट्री मंडी के भीतर पाई गई तो सिक्योरिटी गार्ड, सुपरवाइजर और जिस आढ़ती का माल होगा, उसके खिलाफ स त कार्रवाई की जाएगी। सभी एंट्री पॉइंट पर तैनात कर्मचारियों से स ती से कहा गया है कि प्रोडक्ट्स का नाम, वजन और किस आढ़ती के नाम पर बिल्टी कटी है, सब नोट किया जाएगा। मंडी में काफी ‘गंदगी है, उसे साफ करने में समय लगेगा, लेकिन उ मीद है हम इसमें कामयाब होंगे

बोर्ड की लापरवाही से बिगड़े हालात

मार्केट कमेटी में जमा होने वाली फीस लगातार घटती जा रही थी। कोई रजिस्टर मेंटेन नहीं किया जा रहा था। एंट्री और एग्जिट पॉइंट खाली पड़े हुए थे। सिक्योरिटी गार्ड भी 8 घंटे की ड्यूटी बजा रहे थे। हर महीने फीस कम आने का रोना मार्केट कमेटी रोती रही और बोर्ड भी उसकी पीठ पर हाथ फेरता रहा। रिश्वतखोरी और मिलीभगत के आरोप लगने के बावजूद बोर्ड ने कोई कार्रवाई नहीं की। उसी वजह से हालात ये हो गए कि मार्केट कमेटी के ऊपर बोर्ड का करोड़ों बकाया है। समय रहते एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी एक्शन ले चुके होते तो हालात इतने खराब न होते। अब तक भ्रष्टाचार की जड़ों ने पूरी मंडी को अपने शिकंजे में ले लिया है।

आज तक लागू नहीं हुए सुझाव

जांच रिपोर्ट में दिए सुझावों पर मार्केट कमेटी के अधिकारियों ने सहमति देते हुए जल्द लागू करने की बात कही थी लेकिन सब कुछ फाइलों में बंद होकर रह गया। सालों बीतने के बाद भी मार्केट कमेटी के अधिकारियों ने इन सुझावों को लागू कर फीस चोरी पर लगाम लगाने की जहमत नहीं उठाई। और कशिश मित्तल के जाने के बाद किसी ने भी उन फाइलों की धूल नहीं झाड़ी। आईएएस अफसर रूपेश कुमार ने कुछ समय पहले ही स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के सेके्रटरी पद को संभाला है। आते ही इस तरह की कार्रवाई करने से साबित होता है कि उनका होमवर्क बहुत तगड़ा है। पुरानी फाइलें उन्होंने पढ़ी हैं और रिटायर्ड जज द्वारा दिए गए सुझावों को अमलीजामा पहनाना शुरू भी कर दिया है।