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फैटी लिवर, डायबिटीज, मोटापा, हाई बीपी, हार्ट अटैक व स्ट्रोक और कैंसर हैं अगली महामारी
-देश में 30 फीसदी फैटी लिवर. 10 करोड़ डायबिटिक और 15 करोड़ प्री डायबेटिक मरीज
-चंडीगढ़ में 45 वर्ष से अधिक 56 फीसदी लोग मोटापे से ग्रस्त

चंडीगढ़ दिनभर।
सार्वजनिक स्थान पर लिखा होता है आप अपने सामान के खुद जिम्मेदार हैं। जरा इसको अपने ऊपर फिट करके देखें। आपके स्वास्थ्य के लिए भी आपको खुद ही जिम्मेदारी उठानी होगी। शरीर अस्वस्थ्य तो समझो जिंदगी अस्त व्यस्त। वैसे, इसके लिए आपको बस अपना रुटीन दुरुस्त करना है, शरीर से पैदल चलने, व्यायाम करने और साइकिलिंग जैसे काम करवाने हैं। फिर देखिए कि जीवन कितना सुखमय हो जाएगा।

आम लोगों के स्वास्थ्य पर काम कर रहे पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर व सोशल मीडिया द्वारा मिलियन लोगों की जागरूकता में जुटे डॉ. एचके खरबंदा ने कहा कि स्वास्थ्य दिवस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी मेरा स्वास्थ्य, मेरा अधिकार की थीम रखी है। जिसको फॉलो करना चाहिए। अब दिनोदिन स्वास्थ्य से जुड़ी कठिनाईयां बढ़ती जा रही हैं। यह सब खुद की वजह से ही हो रहा है। हमारी बेपरवाह और अव्यवस्थित जीवनशैली नान कम्युनिकेबल डिसीज बीमारियां को जन्म देती है। इसमें मधुमेह,हाइपरटेंशन और कुछ तरह के कैंसर। इनमें खानपान के साथ-साथ पर्यावरण एक बड़ा कारण है। डायबिटीज और हाइपरटेंशन के पीछे शारीरिक निष्क्रियता भी एक बड़ा कारण होती है।

हर दूसरे को डायबिटीज,मोटापा,हाई बीपी, हार्ट अटैक व स्ट्रोक :
कई घंटों तक एक ही जगह बैठने, पर्याप्त शारीरिक श्रम न करने और खानपान में असंतुलन से लोग मोटापे का शिकार हो रहे हैं। जिसका बीमारियों से सीधा संबंध है। वास्तव में यह मोटापा नहीं है बल्कि जीवन में शिथिलता है। इससे डायबिटीज की ज्यादा आशंका है। वसायुक्त या अस्वच्छ भोजन बीमारियों का कारण बन रहा है। कई संक्रामक बीमारियां खराब जीवनशैली की वजह से विकराल रूप ले रही हैं।

अब जोड़ों की तकलीफ बढ़ती जा रही है
पर्याप्त सक्रियता न होने और अनियंत्रित वजन के कारण जोड़ों की समस्या कम उम्र में भी अब देखी जा रही है। आमतौर पर ये दिक्कतें उम्र बढऩे के साथ होती हैं। गठिया की समस्या अधिक देखने में आती है। इसमें जोड़ो में तेज दर्द महसूस होता है। एक उम्र के बाद घुटनों के दर्द की समस्या होने लगती है। इसमें ज्वाइंट में हड्डियों का आपस में दबाव बढ़ जाता है। इसे ऑस्टियोआर्थराइटिस कहते हैं, जिसमें जोड़ों के हिस्से में द्रव की कमी हो जाती है। आर्थराइटिस के कारण चलने-फिरने में समस्या होती है।

सेहतमंद जीवन के लिये यह करें:
1. आहार अच्छा हो
आपका भोजन हमेशा संतुलित होना चाहिए। इसमें हरी सब्जियों और मौसमी फलों की प्रचुरता का ध्यान रखें। भारतीय भोजन में पर्याप्त पोषक तत्व होते हैं, विटामिंस की भरपाई फलों की जरिये हो जाती है। फाइबर युक्त भोजन जरूरी है। पेट साफ नहीं होने से भी कैंसर की आशंका रहती है। अच्छी सेहत के लिए आहार बिल्कुल दुरुस्त होना चाहिए। नान वेज , अल्कोहल, मैदा ,चीनी,सफेद चावल, पनीर से बनाये दूरी।

2. नींद भरपूर हो
अच्छी सेहत के लिए पर्याप्त और गुणवत्ता पूर्ण नींद जरूरी है। कम से छह से सात घंटे सोना आवश्यक है। अगर नींद खराब होगी, तो उससे भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होंगी। इससे रक्तचाप और डायबिटीज बढ़ सकती है। अगर पहले से है तो यह अनियंत्रित हो सकता है, अत: नींद को लेकर कोई समझौता न करें।

3. जरूरी है शारीरिक श्रम
स्वस्थ शरीर के लिए व्यायाम करना बहुत ही आवश्यक है। अगर शिथिल जीवनशैली रहेगी, तो बीमारियों का होना तय है। आजकल लोग साइकिल चलाना या पैदल चलना बंद कर दिए हैं। इससे समस्याएं बढ़ रही हैं। प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट का ब्रिस्क वाक तो जरूरी ही है। व्यायाम करते रहने से बहुत सी बीमारियों से बचे रहेंगे।

4. योग रखेगा स्वस्थ
अब मॉडर्न मेडिसिन में भी योग व मेडिटेशन के महत्व को स्वीकार किया गया है। योग एकाग्रता बढ़ाता है। इससे अच्छी नींद आती है और शरीर पर्याप्त रूप से शारीरिक और मानसिक गतिविधियों के लिए तैयार होता है। स्वस्थ और निरोगी काया की नींव तैयार करने के लिए योग सबसे प्रामाणित और प्राचीनतम सूत्र है।

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